मुस्कराहत उनकी
उनकी मुस्कुराहट आतिशबाजी की तरह है;
जब हस्ती है तो आसमान की तरह दिल जगमगह उड़ता है,
अरे पागल है वो जो कहते है खुदा ज़मीन पर नहीं उतरता हैं;
मेरा खुदा तो मुझे रोज दिखता है।
उनसे गुफ़्तगू करने को जब भी दिल चाहता है,
क्या कहु क्या ना ये सोच के मन घबराता है।
ये देख हर बार रब मुझे बुलाता है;
कहता उन्हें छोड़ तेरे लिए मेरे पास पूरा जहान हैं;
ऐसा क्या है जो दिमाग मैं सिर्फ उन्ही का नाम है,
उनके इलावा भी करो ज़िन्दगी मैं कुछ खोज,
अब इन्हें कोन समझाये हम मरते है उनके लिए रोज।
उनके एक दीदार को दिल तरसता है हमारा;
बहुत संभाल संभाल के चल रहा है बिचारा,
जनता है
एक गलत कडम और टूट जाएगा,
और फिर दुबारा अपनी दुनिया मैं खो जाएगा।
रोज का जीना मरना है एक आशिक़ की ज़िन्दगी,
अब हैं तो नहीं ये हर इंसान की बंदगी।
पागल हैं वो जो कहते है खुदा जमीन पर नहीं उतरता है,
मेरा खुदा तो मुझे रोज दिखता हैं।
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